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किस्से... ( कुछ अधूरे कुछ पूरे)

                                                    किस्से ...                   ( कुछ अधूरे कुछ पूरे)                कहानी  सुननी है... किसकी..? में तो किस्से सुनता हूँ, तो बताओ किस्से सुनोगे...? मेरे, तुम्हारे, हमारे या दूसरो के या किसी तीसरे किस्से तुम सुनोगे।। मेरी गर्लफ्रैंड, तुम्हारी गर्लफ्रैंड या किसी तीसरे की गर्लफ्रैंड के या गर्लफ्रैंड से हुई रातो को उन खूबशूरत बातो के किस्से तुम सुनोगे।। अरे चलो शुरू से शुरू करते है।। बचपन में किए उन सच्चे झूठे वादों के जो अक्सर अधूरे रह गए या  स्कूल ग्राउंड में हुए उन झगड़ो के यादो के किस्से तुम सुनोगे।। क्लास में पीछे बैठ कर आगे बैठी अपनी क्रश के यूं ही पलट कर टकराती हुई नजरों के किस्से तुम सुनोगे।। एग्जाम में चीटिंग करते हुए पकड़े जाने के या स्कूल की वो आखरी शाम जब तुम रोना तो चाहते थे लेकिन फिर मिलगे का वादा कर रो नही प...

The watch... (love story of luck or unluck)

       2 December 2016 "Hey, good morning happy birthday. " "Thank you." "कहाँ हो तुम ?" "बस j k temple आया हूं।" प्रतीक ने कहा। 'तुम इतनी सुबह सुबह मंदिर पहुंच गए।" निषी ने चौकते हुए प्रतीक से फोन पर कहा। "हाँ आ जाओ मेरे पास फिर साथ चलते हैं, जहां जाना होगा।" प्रतीक उत्सुक होते हुए बताया। "चलो आती हूं वैसे भी birthday boy को आज कौन मना करेगा।" निषी नखरे दिखाते हुए बोली। J k temple कानपुर की खूबसूरत जगहों में से एक है। राधा कृष्ण का मंदिर जो एक खूबसूरत एहसास कराता है और फिर प्रतीक के  इस खाली दिन पर निषी की वहाँ पर मुलाकात इस शहर की खूबसूरती को और सुंदर बना रही थी। प्रतीक निशी मिलते है और फिर मंदिर से मूवी फिर मूवी से घर और प्रतीक  के बर्थडे पर उसके बर्थडे का सबसे खूबसूरत गिफ्ट एक hug. अरे कहानी का टाइटल का जिक्र तो हुआ ही नहीं, अब होगा शाम के डिनर के साथ । हाँ शाम का डिनर अब निशी को 8:00 बजे हॉस्टल भी तो पहुंचना होता था ।   कॉलेज लाइफ की ये बातें अक्सर बहुत खूबसूरत होती है कि जिंदगी हमारे हिसाब से चलती है। ख...

The evening...^2 (Known or unknown love story?)

  To read 1st part- The evening-1                      The evening...^2  (Known or unknown love story?)   उफ्फ ये सफर...हर बार कुछ न कुछ याद दिलाता रहता है। प्रतीक ट्रैन से अपने बचपन और माँ के शहर से वापस आ रहा था। और हर पल बढ़ती ट्रैन की रफ्तार के साथ और वो पीछे छूटते शहर के साथ वो बचपन की धुंधली यादे ताज़ा हो रही थी। तो चले फिर से फ़्लैश बैक में boooommm.... " मम्मी में जाऊ खेलने सामने वाले पार्क में ।" मेने माँ से ज़िद करते हुए बोला। "नहीं अभी नहीं पहले ये दूध खत्म करो तभी जाने देंगे।" माँ ने प्यार से बोला। में फटाफट दूध खत्म करके सामने वाले पार्क में  खेलने के लिए पहुँचा। यही जगह थी हमारी हर शाम की हम दोस्तो की में , नितिन , करिश्मा , अरमान और निषी रोज यही खेलते मस्ती करते और दिन ढलने से पहले अपने अपने घर चले जाते थे। लेकिन वो दिन कभी नही भूलने वाला स्कूल का उस साल का आखिरी दिन था । स्कूल वेन से हम सब बच्चे लौट रहे थे , उस दिन अपने दोस्त से ज़िद करके आगे  बैठा था। इतना याद है वो सड़क ...

The evening-1 (Known or unknown love story?)

"हेल्लो प्रतीक क्या हो रहा है चल लंच पर चलते है।" ऋषभ प्रतीक के केबिन में आते हुए बोला। "नही यार मूड नही है।" ऋषभ अंदर आकर बोला "क्या हो गया है?" "कुछ नही यार बस ऐसे ही है।" "बता ना कुछ दिन से देख रहा हूँ बहुत परेशान है।" ऋषभ प्रतीक के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला। "कुछ नही एक लड़की है यार बस उसने परेशान कर रखा है यार।" बस प्रतीक ने कहा। "क्या मतलब कुछ समझा नही कोन सी लड़की कहाँ मिल गयी ??" ऋषभ परेशान होते हुए बोला "अच्छा सुन तुझे शुरू से सुनाता हूँ।" "सुना।" चलो चलते है फ़्लैश बैक में booom "बात एक महीने पहले की है , याद है मेने छुट्टी ली थी।" हर शाम की तरह उस शाम भी करवटे बदल रहा था । घड़ी की टिक टिक के साथ समय गुजरता जा रहा था, उफ्फ ये क्यों ऑफिस से छुट्टी ले लेता हूँ यार। तभी घड़ी की टिक टिक को तोड़ते हुए दरवाजे की घण्टी बजती है। में सोचता हूँ इस समय को होगा घर पर तो में अकेला रहता हूँ और दोस्तो को पता है में बाहर गया हूँ, फिर कोन होगा? दरवाजा खोला तो कोई नही था, में गुस्से म...

A story (एक कहानी)

                      A story... (एक कहानी)                      (Short story in shayri)   # कितने दिनों बाद याद में तुम्हारी लिख रहे है...     हाँ यादे हमारी लिख रहे है।।           -shivam kushwaha # अक्सर अकेले में याद तुम्हारी बहुत आती है...    तुम दूर जो रहते हो लेकिन ख़्यालों में पास बहुत    आते हो।।                  -shivam kushwaha # मुलाकातो की हमारी वो शामें आज भी याद है...    तुम्हारे साथ घास पर वो नंगे पांव चलना आज भी     याद है।।                   -shivam kushwaha # इन पांव की धड़कन अक्सर वही रुक जाती थी...    तुम जो शाम को यूँ पलट कर चले जाते थे।।    ...

किस्से व्हाट्सएप के... (हमारी अधूरी सी पूरी कहानी)

किस्से व्हाट्सएप के...                   (हमारी अधूरी सी पूरी कहानी) -ok to ye final gud bye??? -Ha, kyu abhi bhi kuch baki hai hamare beech kya?? -Nhi... -To final gud bye.. -Ok bye...     Can't reply You are blocked by contact तो कुछ ऐसी थी हमारी वो आखरी बात । गलती किसकी थी पता नही शायद किसी की नहीं या फिर शायद हम दोनों की नज़रों की थी  ? उसने हमेशा मुझे जिंदगी के हर कदम पर साथ देखा और मेने उसे अपने हर लम्हे के हर पल में साथ देखा। तो सुनोगे हमारी कहानी शायद हमारी अधूरी सी पूरी कहानी... वो सुबह बस स्टॉप पर बस का इंतज़ार कर ही रहा था, ओर जैसे ही बस आयी में चढ़ने ही वाला था की एक लड़की मुझसे टकरा गई, कुछ जल्दी में थी वो बहुत हाँफ भी रही थी। में ध्यान हटा कर बस में चढ़ गया, लेकिन ये क्या वो लड़की भी बस में चढ़ गई। बहुत भरी थी बस लेकिन उसको में देख सकता था, अभी भी हाँफ रही थी, धीरे धीरे मेरे पास ही आ कर खड़ी हो गयी । बाल जुड़े में थे चेहरा पूरा पासीने से था लेकिन वो एक साइड का डिंपल उसे ओर भी ज्यादा खु...

KAHANI- 90's childhood story- 2 (Cute love story)

1st part- 90's childhood story-1               शक्तिमान शक्ति शक्ति शक्तिमान चिल्लाते हुए में दौड़ कर घर पहुँचा , यही तो था हमारा सुपरहीरो। मेने बैग एक तरफ फेक कर टीवी को on किया लेकिन दीदी को तो मेरी खुशी देखी नही जाती तुरन्त चिल्लाई "मम्मी ये देखो प्रतीक ने कपड़े भी नही उतरे और टीवी पर बैठ गया और इसको बोलो टीवी बन्द करे कल मेरा बोर्ड का आखिरी पेपर है।" सच मे बड़े भाई बहनों को छोटो की खुशी देखी नही जाती है। में गुस्से अपने कमरे मे जा कर अपने WWF कार्ड से खेलने लगा। छुट्टी में क्या है जिंदगी सबुह आराम से जगाना कोई नही टोकने वाला।  जितना मर्ज़ी उतना खेलना।  वैसे भी कल दीदी का आखिरी पेपर फिर तो हम नाना जी के घर चले जायेंगे खूब मस्ती करेगे। अगले दिन हम सब मे, दीदी और माँ ट्रैन से नाना जी के घर निकल गए पूरे साल का सबसे अच्छा टाइम ट्रैन से ये 10 घण्टे का सफर में बड़ा मजा आता था। नाना जी के घर कुछ दस दिन रहने के बाद हम सब वापस आ रहे थे, क्योंकि इस बार दीदी के कॉलेज अड्मिशन भी होना था, तो हम जल्दी लौट कर आ गये। जब वापस आया तो एक दिन अक्षत घर आया बोला...