Skip to main content

किस्से... ( कुछ अधूरे कुछ पूरे)

                          

                        किस्से...

                  ( कुछ अधूरे कुछ पूरे)

              

कहानी  सुननी है...

किसकी..?

में तो किस्से सुनता हूँ, तो बताओ किस्से सुनोगे...?


मेरे, तुम्हारे, हमारे या दूसरो के या किसी तीसरे किस्से तुम सुनोगे।।

मेरी गर्लफ्रैंड, तुम्हारी गर्लफ्रैंड या किसी तीसरे की गर्लफ्रैंड के या गर्लफ्रैंड से हुई रातो को उन खूबशूरत बातो के किस्से तुम सुनोगे।।


अरे चलो शुरू से शुरू करते है।।

बचपन में किए उन सच्चे झूठे वादों के जो अक्सर अधूरे रह गए या  स्कूल ग्राउंड में हुए उन झगड़ो के यादो के किस्से तुम सुनोगे।।


क्लास में पीछे बैठ कर आगे बैठी अपनी क्रश के यूं ही पलट कर टकराती हुई नजरों के किस्से तुम सुनोगे।।


एग्जाम में चीटिंग करते हुए पकड़े जाने के या स्कूल की वो आखरी शाम जब तुम रोना तो चाहते थे लेकिन फिर मिलगे का वादा कर रो नही पाए उसके किस्से तुम सुनोगे।।


 एक अनजान शहर में हर एक से अनजान है उस शख़्स के या जो इस शहर की हर एक गलियों से मशरूफ है उसके किस्से तुम सुनोगे।।


अपने छोटे से शहर में एक खुबशुरत घर होकर भी दूसरे शहर में एक कमरे लिए जदोजहद करने के या किराएदार ओर मकान मालिक के होते उन झगड़ो के किस्से तुम सुनोगे।।


वो कॉलेज के खडूस HOD जो अक्सर बेवजह डाँट देते थे या हर वक्त सपोर्ट करने वाले टीचर के किस्से  तुम सुनोगे।।

कॉलेज बंक मारकर मूवी देखने जाने के या हॉस्टल लेट आने पर दीवार से कूद कर अंदर आने के किस्से तुम सुनोगे।।


गर्लफ्रैंड के साथ पहली डेट पर जब तुम इतने नर्वस हो गये की कुछ बोल भी ना पाए या फिर उससे हुए ब्रेकअप के वाद रातभर दारू पीने का वादा कर पहले ही घूंट में उल्टी कर देने के किस्से तुम सुनोगे।।


रात को आखरी मैग्गी के लिए दोस्तो से हुई लड़ाई के या बदले के लिए सुबह दोस्तो से ही बाथरूम में बंद होने के किस्से तुम सुनोगे।।


4 साल इन किस्सो को मिला कर बनी वो डिग्री का किस्सा तुम सुनोगे...

या इन सभी किस्सो से बनी अधूरी कहानी तुम सुनोगे।।

तुम खुद बताओ ना तुम्हें क्या सुनना है।।

                                                    ...life to be continue...

"जिंदगी जीना है तो किस्सो में जिओ ...

 अगर ये किस्सो में जी ली...

 कहानी तो मरने के बाद खुद वा खुद बन जाएगी।।"

Connect with me on social media
Instagram :-

Comments

  1. Making Money - Work/Tennis: The Ultimate Guide
    The way you would 토토사이트 expect from betting on the tennis matches of tennis is งานออนไลน์ to bet on the player poormansguidetocasinogambling you like most. But you also need a 출장안마 different

    ReplyDelete

Post a Comment

Stories you like

kahani - You are my Soulmate or love?

          You are my Soulmate or love? एक रोज जब तुमसे 2 दिन बात नही हुई ओर तीसरे दिन शाम को बात हुई उस रात नींद हमको नही आ रही थी तो सोचा एक बात हमारी तुम्हारी लिखू.. एक खत तुम्हारे लिए लिखू। बस ये डाक से नही मेरे एहसास से तुम तक जाएगा चलो महसूस कराते है तुमको एहसास हमारे... Dear jalebi आज jalebi लिख रहा हूँ little heart फिर कभी ये सच है तुमसे प्यार है या नही पता नही, वैसे हम क्यों करे प्यार तुमसे तेरी इस रूह को मेरे इस शरीर से नही निकाल सकते , तो कैसे प्यार करे तुमसे। काश निकाल पाते तो जरूर मोहब्बत होती तुमसे। अच्छा पुरानी यादों की एक कहानी सुनोगी , वो शाम याद जब हम घर पर थे और तुमने फ़ोन करके बोला था हमने उसको हाँ कर दी तब एक ही सवाल मेरा था क्यों? और तुमने वो एक जवाब दिया जो कभी नही भूलेंगे जाने दो उस दिन से फिर भी हम रोज मिलते और बातो में हम दोनों का एक एहसास था । वो पार्क में जब पहली बार हाथ पकड़ा था तुम्हारा ओर तुमने कुछ नही बोला वो तुम्हारे हाथ  की गरमाहट का एहसास आज भी मेरे हाथ मे है। फिर जब तुम दूर जा रही थी , आँख में आँसू नही थे मेरे। क्यो

kahani - LOVE IN TRAIN (PART-2)

To read 1st part- Love in train (part-1)              LOVE IN TRAIN (PART-2)                         मोहब्बत का सफर   छुक छुक छुक चलो ये चली रेलगाड़ी................... ट्रेन कानपुर सेंट्रल से निकल चुकी है, धीरे धीरे कानपुर पार करती है। अरे ये क्या दोनों अभी भी एक ही केबिन में लेकिन ये क्या दोनों एक दूसरे की तरफ देख भी नही रहे है । प्रतीक मन में बड़बड़ाता है टी.टी. सच में कमीना है एक सीट जुगाड़ नही करा सकता है, इतनी फुल है ट्रेन क्या ? तभी नजर खड़की के बाहर पड़ती है, बने वो झोपडी घरो पर गरीबी और गंदगी में रहते लोग और इतनी ठंड में कम कपड़ो में खेलते बच्च्चे जिनको बस अपनी दुनिया से मतलब है। तभी कानपुर की एक अलग खूबसुरती गंगा नदी। ट्रेन अपनी रफ्तार से चल रही थी और प्रतीक दरवाजे पर खड़े हो पीछे भागती खूबसुरती को कैद करता है। और ट्रेन संगम के अर्धकुम्भ से प्रयागराज स्टेशन पर आ चुकी थी, प्रतीक केबिन में अंदर आया देखा निषी खिड़की बैठी थी , तभी अजानक लगे ब्रेक से उसकी नजर सीट के नीचे से निकले उस झुमके पर पड़ी जो अभी भी नीचे था शायद लड़ाई के चक्कर में उसे दोनों लोग उठाना भूल गए । प्रत

kahani - 90's childhood story (Cute love story) - part-1

                      90's chi l dhood story                         (Cute love story)                       "प्रतीक बेटा उठ जाओ स्कूल नही जाना है  इतनी देर तक कोन सोता है?" ये है हमारी मम्मी पता नही क्यों हमेशा सुबह के सपने खराब करने की आदत है। "प्रतीक प्रतीक" माँ चिल्लताते हुए  बोली। "मे तो उठ गया हूँ मम्मी , बस लेटा ही हूँ।" "अच्छा रुक अभी आती हूँ सुबह सुबह मार खायेगा तू?" अरे ये 90s है इस समय माँ की मार और पापा की डाँट से कोई नहीं बच सकता है। इसलिए माँ के कमरे तक पहुँजने से पहले ही हम नहा कर तैयार हो गए । "आज फिर सिमरन मिलते मिलते रह गयी सपने में   हमको , मम्मी को भी उस टाइम पर चिल्लाना होता है।" में बड़बड़ाते हुए नाश्ते की टेबल पर पहुँचा ही था कि "क्या बड़बड़ा रहे हो तुम?"  दीदी ने पूछा। में उनकी तरफ देखते हुए बोला "कुछ नही आपसे मतलब।" माँ किचन से मुझे नाश्ता और दूध देते हुए बोली "आज आखिरी पेपर है कल से तुम्हरी गर्मियो की छुट्टी शुरू है तो खुशी में बेकार पेपर मत कर आना समझे ।&

kahani - LOVE IN TRAIN (LAST PART)

To read 3rd part- Love in train (part-3)             LOVE IN TRAIN (LAST PART)                               मोहब्बत का सफर सुबह के सूरज की रोशनी खिड़की से सीधे प्रतीक के मुँह पर पड़ते हुए उसको एक नई सुबह का एहसास करा रही थी। आँखे जब नीचे झुकी देखा निषी उसकी गोद में सर रख कर सो रही थी। ना जाने क्यों प्रतीक की हिम्मत नही हुई उसे उठाने की बस एक नज़र उसे देखता रहा , वो मीठी धूप निषी के चेहरे को एक अलग ही चमक दे रहे थी। प्रतीक ने धीरे धीरे से उसके चेहरे पर आते बालों को हटा दिया , लेकिन तभी निषी की आँख खुल गयी । खुद को प्रतीक की गोद में देख उठी और बोली - "सॉरी वो रात को याद नही रहा होगा।" "अरे कोई बात नही।" प्रतीक हँसते हुए बोला। You are reading story at storytellershivam.in थोड़ी देर बाद अब दोनों अपनी सीट पर चुपचाप बैठे खिड़की के बाहर वो बर्फीले पहाड़ो का देख रहे थे ट्रेन सिक्किम मे आ चुकी थी। बस कुछ घण्टो का सफर और बाकी था। तभी चाय आती है। प्रतीक केबिन की शान्ति को तोड़ते हुए पूछता है - "तुम घर से क्यों भाग कर आयी हो?" निषी हँस देती कहती है

The evening...^2 (Known or unknown love story?)

  To read 1st part- The evening-1                      The evening...^2  (Known or unknown love story?)   उफ्फ ये सफर...हर बार कुछ न कुछ याद दिलाता रहता है। प्रतीक ट्रैन से अपने बचपन और माँ के शहर से वापस आ रहा था। और हर पल बढ़ती ट्रैन की रफ्तार के साथ और वो पीछे छूटते शहर के साथ वो बचपन की धुंधली यादे ताज़ा हो रही थी। तो चले फिर से फ़्लैश बैक में boooommm.... " मम्मी में जाऊ खेलने सामने वाले पार्क में ।" मेने माँ से ज़िद करते हुए बोला। "नहीं अभी नहीं पहले ये दूध खत्म करो तभी जाने देंगे।" माँ ने प्यार से बोला। में फटाफट दूध खत्म करके सामने वाले पार्क में  खेलने के लिए पहुँचा। यही जगह थी हमारी हर शाम की हम दोस्तो की में , नितिन , करिश्मा , अरमान और निषी रोज यही खेलते मस्ती करते और दिन ढलने से पहले अपने अपने घर चले जाते थे। लेकिन वो दिन कभी नही भूलने वाला स्कूल का उस साल का आखिरी दिन था । स्कूल वेन से हम सब बच्चे लौट रहे थे , उस दिन अपने दोस्त से ज़िद करके आगे  बैठा था। इतना याद है वो सड़क पर  सामने से आता तेज रफ्तार में बहकता ट्रक और एकदम से धड़ाम

kahani - suicide Note ( horrer story)

                            SUICIDE NOTE निषी अपने हाथों में एक नोट लिए बैठी रोये जा रही थी। "काश सुन ली होती उसकी बात क्यों नही सुनी मेने क्यों क्यों क्यों?" ये सोचते सोचते एक बार फिर नज़र उस कागज के प्रतीक के सुसाइड नोट पर गयी.. Dear निषी यहाँ कोई भी मेरी बात सुनने को राज़ी नही था लेकिन ये सच है इस हॉस्टल के वो 107 कमरे में कुछ तो है। जिस दिन से में उसके बगल वाले रूम 106 में शिफ्ट हुआ था , हर पल एहसास होता कोई है दीवार के उस तरफ जो रोये जा रहा था । उस शाम जब सब फ्रेशर पार्टी थे तब में किसी काम से रूम आया था तो बालकनी में कोई खड़ा था और  बार बार फ़ोन पर बात किये जा रहा था "क्यों अलग हो रहे हो आप दोनों ? लव मेरिज की थी आप दोनों ने फिर क्यों मेरे बारे में सोचो" जैसे ही मेने उसे आवाज दी वो तुरन्त भाग गया अपने कमरे में । वो ही कमरा 107 जब पास जा कर देखा कमरे में तो ताला लगा था , में परेशान हो गया । लेकिन लगा की थकान की वजह से भ्र्म हो गया होगा । उस दिन से जब भी में बाहर खड़े हो कर तुमसे बात करता , लगता मानो कोई हँस रहा हो मुझ पर। बहुत पूछा उसके बारे मे

kahani - LOVE IN TRAIN (PART-3)

To read 2nd part Love in train (part-2)                      LOVE IN TRAIN (PART-3)                               मोहब्बत का सफर "अरे तुम्हारी आँख में आँसू , तुम रोती भी हो प्रतीक निषी को देखते बोला। तभी प्लेटफार्म की लाइट एकदम से बंद हो जाती है, निषी पलट कर प्रतीक से चिपक गयी। प्रतीक इस अचानक मिलन से चौक गया लेकिन उसके उदास मन और डरे हुए चेहरे को देख कुछ नही बोल पाया, पहली बार कोई लड़की उसके इतने करीब थी इसीलिए सोच ही नही पाया कि क्या करे। प्रतीक ने महसूस किया उसकी धड़कन निषी की धड़कन की आगे बन्द हो चुकी है और निषी का दिल डर से इतनी तेज़ धड़क रहा था , कि वो उसे अपने सीने में महसूस कर सकता था । तभी खुद को संभालते हुए निषी के सर पर हाथ रखते हुये प्यार से उसके कान में बोला-"डरो मत में हूँ ना, अच्छा अब घर फ़ोन लगा दो और बता दो मे प्रॉब्लम में हूँ।" तभी लाइट आ जाती है निषी खुद को प्रतीक के साथ से देख खुद एकदम से अलग करती है। उसकी आँखे में उसका शरमाना प्रतीक साफ साफ दिख रहा होती है , फिर वो अपना फ़ोन देखती है लेकिन फ़ोन उसके पास नही होता लगता है। "फ़ोन ट्रे

kahani - LOVE IN TRAIN (PART-1)

                 LOVE IN TRAIN(part-1)                            (मोहब्बत का सफर)   " भाई कहाँ की तैयारी आज इतनी जल्दी क्यों निकल रहा है घर ?" किसी ने प्रतीक के केबिन का दरवाजा खोलते हुए पूछा । प्रतीक फाइलो को अलमारी में लॉक करते हुए पलटा देखा दरवाजे पर ऋषभ खड़ा था ।   ऋषभ ने फिर इशारे से पूछा- कहाँ ? प्रतीक जल्दी- जल्दी अपने काम में व्यस्त होते हुए बोला "बाजार जाना है तू भूल गया कल ट्रेन है मेरी निकलना है ,तू भी बाजार चल शॉपिंग करनी है ।"  "ok wait 10 min you just lock your cabin i m coming" ऋषभ  बोलते हुआ चला गया । ऋषभ और प्रतीक एक ही ऑफिस में  साथ काम करते और flatemate और कॉलेज टाइम से पक्के यार है , प्रतीक को कल दार्जलिंग जाना है घूमने तो उसी के लिए शॉपिंग करनी है । दोनों ऑफिस के काम खत्म करके  शॉपिंग के लिये निकल जाते है । दोनों शॉपिंग खत्म करके लोट रहे थे तभी रस्ते में ऋषभ प्रतीक की तरफ गुस्से से देखता है , प्रतीक अनजान बनते हुए बोलता है "क्या? मेने क्या किया यार अब  यार उसको एक्स्ट्रा पैसे क्यों दू जब उसका रेट कम है ।" &q

किस्से व्हाट्सएप के... (हमारी अधूरी सी पूरी कहानी)

किस्से व्हाट्सएप के...                   (हमारी अधूरी सी पूरी कहानी) -ok to ye final gud bye??? -Ha, kyu abhi bhi kuch baki hai hamare beech kya?? -Nhi... -To final gud bye.. -Ok bye...     Can't reply You are blocked by contact तो कुछ ऐसी थी हमारी वो आखरी बात । गलती किसकी थी पता नही शायद किसी की नहीं या फिर शायद हम दोनों की नज़रों की थी  ? उसने हमेशा मुझे जिंदगी के हर कदम पर साथ देखा और मेने उसे अपने हर लम्हे के हर पल में साथ देखा। तो सुनोगे हमारी कहानी शायद हमारी अधूरी सी पूरी कहानी... वो सुबह बस स्टॉप पर बस का इंतज़ार कर ही रहा था, ओर जैसे ही बस आयी में चढ़ने ही वाला था की एक लड़की मुझसे टकरा गई, कुछ जल्दी में थी वो बहुत हाँफ भी रही थी। में ध्यान हटा कर बस में चढ़ गया, लेकिन ये क्या वो लड़की भी बस में चढ़ गई। बहुत भरी थी बस लेकिन उसको में देख सकता था, अभी भी हाँफ रही थी, धीरे धीरे मेरे पास ही आ कर खड़ी हो गयी । बाल जुड़े में थे चेहरा पूरा पासीने से था लेकिन वो एक साइड का डिंपल उसे ओर भी ज्यादा खुबशूरत बना रहा था। "टिकट टिकट कहाँ जाना है मैडम आपको?&q

90s childhood story (Cute love story) part-2

To read 1st part- 90's childhood story-1              90s childhood story-2                         (Cute love story) शक्तिमान शक्ति शक्ति शक्तिमान चिल्लाते हुए में दौड़ कर घर पहुँचा , यही तो था हमारा सुपरहीरो । मेने बैग एक तरफ फेक कर टीवी को on किया लेकिन दीदी को तो मेरी खुशी देखी नही जाती तुरन्त चिल्लाई "मम्मी ये देखो प्रतीक ने कपड़े भी नही उतरे और टीवी पर बैठ गया और इसको बोलो टीवी बन्द करे कल मेरा बोर्ड का आखिरी पेपर है।" सच मे बड़े भाई बहनों को छोटो की खुशी देखी नही जाती है। में गुस्से अपने कमरे मे जा कर अपने WWF कार्ड से खेलने लगा। छुट्टी में क्या है जिंदगी सबुह आराम से जगाना कोई नही टोकने वाला । जितना मर्ज़ी उतना खेलना। वैसे भी कल दीदी का आखिरी पेपर फिर तो हम नाना जी के घर चले जायेंगे खूब मस्ती करेगे । अगले दिन हम सब मे , दीदी और माँ ट्रैन से नाना जी के घर निकल गए पूरे साल का सबसे अच्छा टाइम ट्रैन से ये 10 घण्टे का सफर में बड़ा मजा आता था। नाना जी के घर कुछ दस दिन रहने के बाद हम सब वापस आ रहे थे , क्योंकि इस बार दीदी के कॉलेज अड्मिशन भी होना था ,