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बिंदी... ( A story of dream & girl)-1

  

                         बिंदी... 

                    ( A story of dream & girl)

         


Hey, में पलक वो ही एक मिडिल क्लास फैमिली की लड़की। एक खास बात बताऊ मिडिल क्लास फैमिली की,  नही मिडिल क्लास फैमिली की लड़की की वो सपने तो बहुत देखती है लेकिन वो पूरे नही अक्सर अधूरे ही रह जाते है। मेने तो बस एक ही सपना देखा था और इस मिडिल क्लास के पिंजरे को तोड़ने के लिए माँ को जिद करके ओर दीदी को खूब सारा मख्खन लगा कर दोनों को अपनी तरफ करके ओर अपने अंदर की पूरी हिम्मत जुटा कर पापा के सामने थी- "पापा मुझे जॉब करनी है। अपने लिए कुछ करना है, आपके लिए कुछ करना है।"

पापा ने एक चिंताजनक चेहरा बनते हुए पूछा- "क्यों और कोई जरूरत नही है जब तक मे हूँ।"

मेने एक बार फिर विनती करते हुए कहा- "प्लीज् पापा मुझे कुछ बनना है एक मौका दे दो ना।"

इस बार मेरे दोनों कंधो पर एक तरफ दीदी ओर एक तरफ माँ का हाथ था तो शायद पापा मानने को तैयार दिख रहे थे।

मेने पापा के पास बैठ कर बोला- "बस एक मौका मेरे लिए, आपका भरोसा कभी नही टूटने दूँगी ओर ना कोई ऐसा काम करुँगी जिससे आपकी इज़्ज़त को धक्का लगे।" पापा गहरी साँस भरते हुए कहा- "ठीक है लेले, शायद मेरे बेटे की वो अधूरी कमी को तू पूरी कर पाए।"

उस रात सोने से पहले पापा को बहुत गहराई मे सोचते हुए पहली बार देखा था, लेकिन में खुश थी इस  पिंजरे को तोड़ने के लिए अगली सुबह से लम्बी उड़ान जो भरनी थी। मेने अपने हर एक दोस्त को बोल दिया कोई जॉब हो बताना। मेरे जिंदगी उन चार खास दोस्तो में जान बसती है।

जिनका जिक्र इस किस्से में नही लेकिन ये किस्सा होने की वजह वो ही है।

4 से 5 दिन की मेहनत के बाद एक कोचिंग क्लास में रेसेप्सनिस्ट की जॉब का ऑफर आया, तो में निकल पड़ी अपने माथे पर कली बिंदी लगा कर, कुछ नही आता था, लेकिन वो है ना कुछ अच्छा करने के लिए चलो तो कुछ अच्छे लोग मिल ही जाते है। कोचिंग के सर ने कहा- "में सब सीखा दूँगा तुम जॉइन कर लो।" मेरी पहली सैलरी 6500 INR कितनी खुश थी।  एक साल जॉब करने के बाद ओर अपने सपने के लिए थोड़े से पैसे जोड़ने के बाद सर के पास पहुँची- सर कल से ओवरटाइम करुँगी मुझे एक कोर्स करना प्लीज सर मना मत करना।

सर से permission लेने के बाद बारी थी अब घर पर बताने की तो इस बार दीदी ओर माँ फिर मेरे पीछे ही थी तो एक हिम्मत थी। इस बार तो पापा से भी ज्यादा जिद भी नही करनी पड़ी। वो तारीख आज भी याद है अपने जोड़े हुए पैसे,  कुछ माँ से ओर कुछ दोस्तों से पैसे उधार लेकर में खड़ी थी अपने सपने की ओर दूसरा कदम बढ़ाने के लिए "lakme accedmy 3 month makeup artist course" मेरा सपना। लेकिन नजर तो हर एक को लगती तो लग गयी 25 मार्च को।

न्यूज़ आयी  कि 25 मार्च से 21 दिन का lockdown ओर फिर ये lockdown बढ़ता ही गया। और इस बढ़ते lockdown के साथ मेने मेरे सपने को भी दूर जाते देखा ओर कितनी दूर जाता कुछ पता नही था। इस बीच मेरी जॉब भी चली गयी जिसने मुझे ओर तोड़ दिया।

                      ... कहानी जारी रहेगी...

       

 अरे रुको इस किस्से में इस किस्से को लिखने वाले का किरदार आ चुका है, लेकिन उसका जिक्र इस किस्से के दूसरे हिस्से में होगा।


Ps- ये किस्सा मेरी जिंदगी में जब आया में दिमाग़ से बिल्कुल खाली हो चुका था, शायद टूट ही गया था। ओर इस किस्से ने मुझे जिंदगी से झूझने की एक आदत लगा दी। और आज जब इस किस्से को लिख रहा हूँ, तब भी खाली हो चुका हूँ, या पूरा टूट चुका हूँ। तो इस किस्से के उस किरदार को इस बार खुद में जीना चाहता हूँ।

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