Skip to main content

Mardaani 3 Movie Review in Hindi | Rani Mukerji की दमदार वापसी


Mardaani 3 Movie Review

Mardaani 3 Movie Review

Mardaani 3 एक दमदार बॉलीवुड एक्शन-क्राइम थ्रिलर फिल्म है, जिसमें रानी मुखर्जी एक बार फिर पुलिस ऑफिसर शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में नजर आती हैं। यह फिल्म Mardaani फ्रेंचाइज़ी की तीसरी कड़ी है और समाज से जुड़े गंभीर मुद्दों को बेहद सशक्त तरीके से पेश करती है।

अगर आप मजबूत महिला किरदार, थ्रिलर कहानी और रियलिस्टिक एक्शन पसंद करते हैं, तो Mardaani 3 आपको जरूर पसंद आएगी।


Mardaani 3 Story (कहानी)

Mardaani 3 की कहानी एक गंभीर और संवेदनशील अपराध के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में बच्चियों के अपहरण और मानव तस्करी जैसे मुद्दों को दिखाया गया है। कहानी तब शुरू होती है जब कई मासूम लड़कियां अचानक गायब होने लगती हैं और पुलिस सिस्टम इस केस को ठीक से संभाल नहीं पाता।

इसी दौरान केस की जिम्मेदारी डीसीपी शिवानी शिवाजी रॉय को दी जाती है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, कहानी एक बड़े और खतरनाक अपराध नेटवर्क की ओर इशारा करती है। शिवानी को सिर्फ अपराधियों से ही नहीं, बल्कि सिस्टम की कमियों और अंदरूनी राजनीति से भी लड़ना पड़ता है।

कहानी तेज रफ्तार है और हर कुछ मिनट में नए ट्विस्ट देखने को मिलते हैं, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखते हैं।


Rani Mukerji Performance (अभिनय)

Mardaani 3 की सबसे बड़ी ताकत रानी मुखर्जी का अभिनय है। उन्होंने शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार को एक बार फिर पूरी ईमानदारी और मजबूती के साथ निभाया है।

उनका बॉडी लैंग्वेज, डायलॉग डिलीवरी और एक्शन सीन काफी प्रभावशाली हैं। भावनात्मक दृश्यों में भी उनका अभिनय दर्शकों से जुड़ जाता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि पूरी फिल्म रानी मुखर्जी के कंधों पर टिकी हुई है और वह इसे पूरी तरह संभालती हैं।


Villain और Supporting Cast

इस फिल्म का विलेन भी कहानी को मजबूत बनाता है। खलनायक का किरदार चालाक, क्रूर और दिमाग से खेलने वाला है, जो शिवानी के लिए एक बड़ी चुनौती बनता है।

सपोर्टिंग कास्ट ने भी अपना काम ठीक-ठाक किया है। पुलिस टीम, परिवार और अन्य किरदार कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं, हालांकि फोकस मुख्य रूप से शिवानी पर ही रहता है।


Direction, Screenplay और Action

फिल्म का निर्देशन गंभीर और रियलिस्टिक है। डायरेक्टर ने कहानी को जरूरत से ज्यादा ग्लैमराइज नहीं किया, बल्कि इसे जमीन से जुड़ा रखा है।

एक्शन सीन रॉ और रियल लगते हैं। यहां बेवजह के स्लो-मोशन या ओवर-द-टॉप स्टंट नहीं हैं। चेज सीन, फाइट सीक्वेंस और इंटरोगेशन सीन कहानी में थ्रिल बनाए रखते हैं।

स्क्रीनप्ले कुछ जगहों पर थोड़ा प्रेडिक्टेबल लग सकता है, लेकिन फिल्म की pacing इतनी अच्छी है कि बोरियत महसूस नहीं होती।


Music और Background Score

Mardaani 3 में गानों की संख्या कम है, जो फिल्म के टोन के हिसाब से सही फैसला है। बैकग्राउंड म्यूजिक थ्रिल और टेंशन को अच्छे से सपोर्ट करता है।

जहां-जहां कहानी इमोशनल या सस्पेंसफुल होती है, वहां बीजीएम फिल्म के असर को और बढ़ा देता है।


Positive Points (फिल्म की खूबियां)

रानी मुखर्जी का दमदार और भरोसेमंद अभिनय

मजबूत सामाजिक मुद्दे पर आधारित कहानी

रियलिस्टिक एक्शन और थ्रिल

तेज रफ्तार स्क्रीनप्ले

महिला प्रधान फिल्म होने के बावजूद मजबूती से पेश की गई


Negative Points (कमियां)

कहानी कुछ जगहों पर पहले की फिल्मों जैसी लग सकती है

कुछ सीन अनुमान लगाए जा सकते हैं

सपोर्टिंग किरदारों को ज्यादा गहराई नहीं मिलती


Mardaani 3 Movie Review Verdict

कुल मिलाकर, Mardaani 3 एक सशक्त, गंभीर और प्रभावशाली एक्शन-थ्रिलर फिल्म है। यह उन दर्शकों के लिए है जो सिर्फ एंटरटेनमेंट ही नहीं, बल्कि मैसेज वाली फिल्में देखना पसंद करते हैं।

अगर आपको Mardaani सीरीज की पिछली फिल्में पसंद आई थीं और आप रानी मुखर्जी की दमदार एक्टिंग के फैन हैं, तो यह फिल्म जरूर देखें।


⭐ Final Rating: 3.5/5


Review by storyteller Shivam

Comments

Stories you like

देहात प्रेम- 1 (A love story in village)

                                                                           माँ की 4 मिसकॉल होने के बाद जब प्रतीक ने फ़ोन उठाया, माँ चिल्लाते हुए बोली– "इतनी देर तक कोन सोता है, अकेले बाहर रहते हो तो ऐसे रहोगे।" प्रतीक ने माँ की डांट से बचते हुए कहा- “अरे वो रात को थोड़ा पढ़ते पढ़ते थोड़ी देर हो गयी थी, वैसे फोन क्यों किया इतनी सुबह सुबह अपने कोई काम है?” "हाँ वो छुट्टी हो गयी है ना तेरी कोचिंग की तो गांव चले जाओ बड़े पापा बुला रहे है, वैसे भी दादा जी जब से स्वर्गवासी हो गए है, तुम गाँव नही गए हो।" मम्मी ने आर्डर देते हुए कहा। प्रतीक ना ना करते रह गया, लेकिन माँ के आगे किसकी चलती, जल्दी जल्दी तैयार हो कर अपनी स्कूटी लेकर गाँव निकल गया, जाते जाते अपने भाई कम दोस्त को फ़ोन करके बता दिया में आ रहा हूँ। 3 घण्टे के बाद गाँव के अंदर जाने वाली सड़क के पास जा कर प्रतीक ने जैसे ही गाड़ी मोड़ी एक लड़की तेज़ रफ्...

kahani - You are my Soulmate or love?

          You are my Soulmate or love? एक रोज जब तुमसे 2 दिन बात नही हुई ओर तीसरे दिन शाम को बात हुई उस रात नींद हमको नही आ रही थी तो सोचा एक बात हमारी तुम्हारी लिखू.. एक खत तुम्हारे लिए लिखू। बस ये डाक से नही मेरे एहसास से तुम तक जाएगा चलो महसूस कराते है तुमको एहसास हमारे... Dear jalebi आज jalebi लिख रहा हूँ little heart फिर कभी ये सच है तुमसे प्यार है या नही पता नही, वैसे हम क्यों करे प्यार तुमसे तेरी इस रूह को मेरे इस शरीर से नही निकाल सकते , तो कैसे प्यार करे तुमसे। काश निकाल पाते तो जरूर मोहब्बत होती तुमसे। अच्छा पुरानी यादों की एक कहानी सुनोगी , वो शाम याद जब हम घर पर थे और तुमने फ़ोन करके बोला था हमने उसको हाँ कर दी तब एक ही सवाल मेरा था क्यों? और तुमने वो एक जवाब दिया जो कभी नही भूलेंगे जाने दो उस दिन से फिर भी हम रोज मिलते और बातो में हम दोनों का एक एहसास था । वो पार्क में जब पहली बार हाथ पकड़ा था तुम्हारा ओर तुमने कुछ नही बोला वो तुम्हारे हाथ  की गरमाहट का एहसास आज भी मेरे हाथ मे है। फिर जब तुम दूर जा रही थी , आँ...

KAHANI- पहली मुलाकात (एक एहसास तुम्हारा)

Semster holidays बस ख़त्म होने ही वाली थी और उससे बाते कभी पूरी ना होती थी। ना जाने क्यों इस बार घर से हॉस्टल आने पर बुरा नही लग रहा था, ना मन उदास था शायद उससे मिलने के लिए उसे मनाने की कोशिश में वो मान गयी थी। और हम कही और खो गए थे कैसी होगी हमारी पहली मुलाकात क्या खास होगा हमारे साथ ? वो एक शाम जब हम message पर बातो में लगे थे। mobile पर चलते वो तेज़ हाथ बता रहे थे की कितना इंताजर है हमको उनके आने वाले reply का। Me : तो क्या सोचा है तुमने या फिर आज भी ना ही सुनने को मिलेगा हमको ?? She : यार तुम भी!! पहले आ तो जाओ  यहाँ घर से फिर सोचोगी। Me : अभी भी सोचना है तुमको !! हद हो गयी वैसे एक बात बोलू ? She : हाँ जरूर बोलो वैसे भी में मना भी करुँगी तो तुम बोलोगे इतना हक़ तो तुम पर हे ही तो बोल ही लो। Me :कुछ भी ना बोला करो यार वैसे तुम पहली लड़की हो जिसने अपनी pic देने की जगह अपना no. दिया है। very unique. She : i don't like click pics, that's why i don't give. और नंबर दिया तो कम से कम तुम्हारी इतनी प्यारी आवाज तो सुनने को मिल गयी। Me : फिर फालतू बाते की तुमने यार। She : अच्...

The evening...^2 (Known or unknown love story?)

  To read 1st part- The evening-1                      The evening...^2  (Known or unknown love story?)   उफ्फ ये सफर...हर बार कुछ न कुछ याद दिलाता रहता है। प्रतीक ट्रैन से अपने बचपन और माँ के शहर से वापस आ रहा था। और हर पल बढ़ती ट्रैन की रफ्तार के साथ और वो पीछे छूटते शहर के साथ वो बचपन की धुंधली यादे ताज़ा हो रही थी। तो चले फिर से फ़्लैश बैक में boooommm.... " मम्मी में जाऊ खेलने सामने वाले पार्क में ।" मेने माँ से ज़िद करते हुए बोला। "नहीं अभी नहीं पहले ये दूध खत्म करो तभी जाने देंगे।" माँ ने प्यार से बोला। में फटाफट दूध खत्म करके सामने वाले पार्क में  खेलने के लिए पहुँचा। यही जगह थी हमारी हर शाम की हम दोस्तो की में , नितिन , करिश्मा , अरमान और निषी रोज यही खेलते मस्ती करते और दिन ढलने से पहले अपने अपने घर चले जाते थे। लेकिन वो दिन कभी नही भूलने वाला स्कूल का उस साल का आखिरी दिन था । स्कूल वेन से हम सब बच्चे लौट रहे थे , उस दिन अपने दोस्त से ज़िद करके आगे  बैठा था। इतना याद है वो सड़क ...

KAHANI- LOVE IN TRAIN-2 ( मोहब्बत का सफर )

Love in train (part-1)               छुक छुक छुक चलो ये चली रेलगाड़ी............. ट्रेन कानपुर सेंट्रल से निकल चुकी है, धीरे धीरे कानपुर पार करती है। अरे ये क्या दोनों अभी भी एक ही केबिन में! लेकिन ये क्या दोनों एक दूसरे की तरफ देख भी नही रहे है। प्रतीक मन में बड़बड़ाता है टी.टी. सच में कमीना है एक सीट जुगाड़ नही करा सकता है, इतनी फुल है ट्रेन क्या? तभी नजर खिड़की के बाहर पड़ती है, बने वो झोपडी घरो पर गरीबी और गंदगी में रहते लोग और इतनी ठंड में कम कपड़ो में खेलते बच्च्चे जिनको बस अपनी दुनिया से मतलब है। तभी कानपुर की एक अलग खूबसूरती गंगा नदी।  ट्रेन अपनी रफ्तार से चल रही थी और प्रतीक दरवाजे पर खड़े हो पीछे भागती खूबसुरती को कैद करता है। और ट्रेन संगम के अर्धकुम्भ से प्रयागराज स्टेशन पर आ चुकी थी, प्रतीक केबिन में अंदर आया देखा निषी खिड़की बैठी थी, तभी अजानक लगे ब्रेक से उसकी नजर सीट के नीचे से निकले उस झुमके पर पड़ी जो अभी भी नीचे था शायद लड़ाई के चक्कर में उसे दोनों लोग उठाना भूल गए।  प्रतीक ने झुक कर उसे उठाया तो निषी देख बोली - "ये मेरा है मुझे ...

किस्से... ( कुछ अधूरे कुछ पूरे)

                                                    किस्से ...                   ( कुछ अधूरे कुछ पूरे)                कहानी  सुननी है... किसकी..? में तो किस्से सुनता हूँ, तो बताओ किस्से सुनोगे...? मेरे, तुम्हारे, हमारे या दूसरो के या किसी तीसरे किस्से तुम सुनोगे।। मेरी गर्लफ्रैंड, तुम्हारी गर्लफ्रैंड या किसी तीसरे की गर्लफ्रैंड के या गर्लफ्रैंड से हुई रातो को उन खूबशूरत बातो के किस्से तुम सुनोगे।। अरे चलो शुरू से शुरू करते है।। बचपन में किए उन सच्चे झूठे वादों के जो अक्सर अधूरे रह गए या  स्कूल ग्राउंड में हुए उन झगड़ो के यादो के किस्से तुम सुनोगे।। क्लास में पीछे बैठ कर आगे बैठी अपनी क्रश के यूं ही पलट कर टकराती हुई नजरों के किस्से तुम सुनोगे।। एग्जाम में चीटिंग करते हुए पकड़े जाने के या स्कूल की वो आखरी शाम जब तुम रोना तो चाहते थे लेकिन फिर मिलगे का वादा कर रो नही प...

KAHANI- 90's childhood story- 1 (Cute love story)

"प्रतीक बेटा उठ जाओ स्कूल नही जाना है इतनी देर तक कोन सोता है?" ये है हमारी मम्मी पता नही क्यों हमेशा सुबह के सपने खराब करने की आदत है। "प्रतीक प्रतीक" माँ चिल्लताते हुए बोली। "मे तो उठ गया हूँ मम्मी, बस लेटा ही हूँ।" "अच्छा रुक अभी आती हूँ सुबह सुबह मार खायेगा तू?" अरे ये 90s है इस समय माँ की मार और पापा की डाँट से कोई नहीं बच सकता है। इसलिए माँ के कमरे तक पहुँजने से पहले ही हम नहा कर तैयार हो गए। "आज फिर सिमरन मिलते मिलते रह गयी सपने में  हमको, मम्मी को भी उस टाइम पर चिल्लाना होता है।" में बड़बड़ाते हुए नाश्ते की टेबल पर पहुँचा ही था कि  "क्या बड़बड़ा रहे हो तुम?"  दीदी ने पूछा। में उनकी तरफ देखते हुए बोला "कुछ नही आपसे मतलब।" माँ किचन से मुझे नाश्ता और दूध देते हुए बोली "आज आखिरी पेपर है कल से तुम्हरी गर्मियो की छुट्टी शुरू है तो खुशी में बेकार पेपर मत कर आना समझे।" समझ नही आता मम्मी का खुश होने के लिए बोल रही है या डराने के लिए ,आखिरी एग्जाम है। स्कूल बस में चढ़ने पर जब  सामने सीट पर बैठे अक्षत को देखा तो...

The evening-1 (Known or unknown love story?)

"हेल्लो प्रतीक क्या हो रहा है चल लंच पर चलते है।" ऋषभ प्रतीक के केबिन में आते हुए बोला। "नही यार मूड नही है।" ऋषभ अंदर आकर बोला "क्या हो गया है?" "कुछ नही यार बस ऐसे ही है।" "बता ना कुछ दिन से देख रहा हूँ बहुत परेशान है।" ऋषभ प्रतीक के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला। "कुछ नही एक लड़की है यार बस उसने परेशान कर रखा है यार।" बस प्रतीक ने कहा। "क्या मतलब कुछ समझा नही कोन सी लड़की कहाँ मिल गयी ??" ऋषभ परेशान होते हुए बोला "अच्छा सुन तुझे शुरू से सुनाता हूँ।" "सुना।" चलो चलते है फ़्लैश बैक में booom "बात एक महीने पहले की है , याद है मेने छुट्टी ली थी।" हर शाम की तरह उस शाम भी करवटे बदल रहा था । घड़ी की टिक टिक के साथ समय गुजरता जा रहा था, उफ्फ ये क्यों ऑफिस से छुट्टी ले लेता हूँ यार। तभी घड़ी की टिक टिक को तोड़ते हुए दरवाजे की घण्टी बजती है। में सोचता हूँ इस समय को होगा घर पर तो में अकेला रहता हूँ और दोस्तो को पता है में बाहर गया हूँ, फिर कोन होगा? दरवाजा खोला तो कोई नही था, में गुस्से म...

The watch... (love story of luck or unluck)

       2 December 2016 "Hey, good morning happy birthday. " "Thank you." "कहाँ हो तुम ?" "बस j k temple आया हूं।" प्रतीक ने कहा। 'तुम इतनी सुबह सुबह मंदिर पहुंच गए।" निषी ने चौकते हुए प्रतीक से फोन पर कहा। "हाँ आ जाओ मेरे पास फिर साथ चलते हैं, जहां जाना होगा।" प्रतीक उत्सुक होते हुए बताया। "चलो आती हूं वैसे भी birthday boy को आज कौन मना करेगा।" निषी नखरे दिखाते हुए बोली। J k temple कानपुर की खूबसूरत जगहों में से एक है। राधा कृष्ण का मंदिर जो एक खूबसूरत एहसास कराता है और फिर प्रतीक के  इस खाली दिन पर निषी की वहाँ पर मुलाकात इस शहर की खूबसूरती को और सुंदर बना रही थी। प्रतीक निशी मिलते है और फिर मंदिर से मूवी फिर मूवी से घर और प्रतीक  के बर्थडे पर उसके बर्थडे का सबसे खूबसूरत गिफ्ट एक hug. अरे कहानी का टाइटल का जिक्र तो हुआ ही नहीं, अब होगा शाम के डिनर के साथ । हाँ शाम का डिनर अब निशी को 8:00 बजे हॉस्टल भी तो पहुंचना होता था ।   कॉलेज लाइफ की ये बातें अक्सर बहुत खूबसूरत होती है कि जिंदगी हमारे हिसाब से चलती है। ख...

बिंदी -1( A story of dream & girl)

          Hey, में पलक वो ही एक मिडिल क्लास फैमिली की लड़की।  एक खास बात बताऊ मिडिल क्लास फैमिली की, नही मिडिल क्लास फैमिली की लड़की की वो सपने तो बहुत देखती है, लेकिन वो पूरे नही अक्सर अधूरे ही रह जाते है।  मेने तो बस एक ही सपना देखा था और इस मिडिल क्लास के पिंजरे को तोड़ने के लिए माँ को जिद करके ओर दीदी को खूब सारा मख्खन लगा कर दोनों को अपनी तरफ करके ओर अपने अंदर की पूरी हिम्मत जुटा कर पापा के सामने थी- "पापा मुझे जॉब करनी है। अपने लिए कुछ करना है, आपके लिए कुछ करना है।" पापा ने एक चिंताजनक चेहरा बनते हुए पूछा- "क्यों और कोई जरूरत नही है जब तक मे हूँ।" मेने एक बार फिर विनती करते हुए कहा- "प्लीज् पापा मुझे कुछ बनना है एक मौका दे दो ना।" इस बार मेरे दोनों कंधो पर एक तरफ दीदी ओर एक तरफ माँ का हाथ था तो शायद पापा मानने को तैयार दिख रहे थे। मेने पापा के पास बैठ कर बोला- "बस एक मौका मेरे लिए, आपका भरोसा कभी नही टूटने दूँगी ओर ना कोई ऐसा काम करुँगी जिससे आपकी इज़्ज़त को धक्का लगे।"  पापा गहरी साँस भरते हुए कहा- "ठीक है लेले, शायद मेरे बेटे की वो अधूरी...