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kahani - LOVE IN TRAIN (PART-1)





                LOVE IN TRAIN(part-1)
                          (मोहब्बत का सफर)


 "भाई कहाँ की तैयारी आज इतनी जल्दी क्यों निकल रहा है घर ?" किसी ने प्रतीक के केबिन का दरवाजा खोलते हुए पूछा । प्रतीक फाइलो को अलमारी में लॉक करते हुए पलटा देखा दरवाजे पर ऋषभ खड़ा था ।   ऋषभ ने फिर इशारे से पूछा- कहाँ ? प्रतीक जल्दी- जल्दी अपने काम में व्यस्त होते हुए बोला "बाजार जाना है तू भूल गया कल ट्रेन है मेरी निकलना है ,तू भी बाजार चल शॉपिंग करनी है ।"  "ok wait 10 min you just lock your cabin i m coming" ऋषभ  बोलते हुआ चला गया । ऋषभ और प्रतीक एक ही ऑफिस में  साथ काम करते और flatemate और कॉलेज टाइम से पक्के यार है , प्रतीक को कल दार्जलिंग जाना है घूमने तो उसी के लिए शॉपिंग करनी है । दोनों ऑफिस के काम खत्म करके  शॉपिंग के लिये निकल जाते है । दोनों शॉपिंग खत्म करके लोट रहे थे तभी रस्ते में ऋषभ प्रतीक की तरफ गुस्से से देखता है , प्रतीक अनजान बनते हुए बोलता है "क्या? मेने क्या किया यार अब  यार उसको एक्स्ट्रा पैसे क्यों दू जब उसका रेट कम है ।" "कमीने इतना पैसा कहाँ ले जायेगा तेरे पापा इतने बड़े आदमी फिर भी तू इतना मोलभाव करता है क्या हो जाये अगर दो पैसे उसे ज्यादा मिल जाये ।" ऋषभ बोला। प्रतीक ने कहा "बात पैसे की नही ईमानदार की है ।" की तभी अजानक तेज़ बारिश शुरू हो गयी "अबे भाग जल्दी ये जनवरी के मौसम में बारिश , ठंड तो दम तोड़ के मानेगी ऋषभ चिल्लता हुआ भाग रहा था कि तभी एक लड़की एकदम से प्रतीक से टकरा गई प्रतीक और वो लड़की दोनों नीचे जमीन पर , जैसे तैसे दोनों उठे तब तक दोनों भीग चुके थे , प्रतीक गुस्से में उठा लेकिन लड़की जल्दी में तो तुरंत चिल्लताते हुए भाग गई "देख कर नही चल सकते हो।" 
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प्रतीक गुस्से से देखता रहा गया  मन में बडबडाते हुए बोला - साड़ी के साथ हील कोन पहनता है और मुझसे बोल रही देख कर नही चल सकते। और ये तुम्हारा earring गिर गया । प्रतीक वापस बुलाता तब तक जा चुकी थी वो ।प्रतीक जल्दी  से car में आ कर बैठ गया देखा ऋषभ भाईसाहब बड़े खुश दिख रहे थे किसी से फ़ोन पर बात करके "अच्छा  see u in the morning bye love u."  बोलते ही फोन रखा भी ना पाया ऋषभ कि प्रतीक बोला-कोन था वे साले ? "अब तू तो जा रहा है घूमने तो में अकेले कैसे रहूँगा तो  अदिती आ रही है सुबह ।" ऋषभ खुश होते हिए बोला प्रतीक ने कहा "अबे साले ये कब हुआ उसको कब बताया तूने ?" ऋषभ चिड़ाते हुए बोला - अरे उसके ऑफिस का काम है तो 3 दिन यही रुकेगी बस यार , और तू ये चोर कब से बन गया वे ? उस लड़की का झुमका क्यों ले आया ?  "अबे चुप गिर गया था जब तक देखा तो निकल गयी तो ले आया और बेवकूफ लड़की खुद देख कर नही  चलती और मुझे चिल्ल्ला रही थी।" प्रतीक मुँह बनाते हुए बोला ।बाते करते करते दोनो घर चल दिए । इधर "निषी कहाँ रह जाती हो और ये क्या बारिश के साथ डुबकी भी लगा आयी तुम !!" दिया हँसते हुए बोली की तभी निषी चिल्लाई "मुझे शौक नही पता नही कोन बद्तमीज़ था टकरा गया कमीना।" दिया फिर बोली - तुझको मेने  झुमके दिए थे एक कहाँ गिरा आयी यार तमको अब कुछ नही दूंगी सब बेकार कर देती हो।" "अरे नही मेरी जान सॉरी अब पता नही कहाँ गिर गया सॉरी अब घर चले। "निषी दिया को समझते हुए बोली। दोनों घर चल देते है। प्रतीक पैकिंग में बिजी था एक बैग दो बैग ये देख ऋषभ - "बोला तू घूमने जा रहा है या घर बसाने इतने बैग !" प्रतीक मुस्कराया तभी नजर उस झुमके पर पड़ी उसे देख मन ये बोलते वापस आपने accesries बैग  रख दिया "पागल लड़की।" 
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अगले दिन हॉल में बैठ ऋषभ और अदितीं साथ में घूमने तैयारी कर रहे थे और प्रतीक दार्जलिंग निकलने की और प्रतीक अपना बैग पैक और एक छोटा सा बैग ले चलने लगा तो ऋषभ देख कर बोला "अबे तूने रात को 3 बैग पैक किए थे और ले कर बस ये छोटे बैग ले कर जा रहा है।" प्रतीक बोला- "अरे घूमने जा रहा हूँ मस्ती करूँगा बाकी सामान वही खरीद लूँगा यार ,ओक्क अब चलता हूँ ट्रेन है मेरी, ख्याल रखना अपना और अदितीं भाभी जी का भी" अदितीं बीच में टोकते बोली "तुम कब भाभी ला रहे हो यार और क्लीन शेव कर ली लुक चैंज स्मार्ट लग रहे हो देखना कही वही भाभी ना मिल जाये।" और सब हँस दिए प्रतीक ने हँसते हुए कहा - "अरे नही बस उस heavy beard लुक से मन भर गया था तो चेंज यार।"

ट्रैन आ चुकी थी प्रतीक ट्रैन के 2 सीटर केबिन में बैठ गाने सुन रहा था कि तभी एकदम दरवाजा खुला और एक लड़की आती है बिलकुल अजीब रफ़ जीन्स जगह जगह फटा हुआ और खुले घुघराले बाल और sunglass के साथ आजनक प्रतीक के गोद में बैग फेक दिया और चिल्लाती है "टी.टी. हुआ तो अपनी मनमानी चलायेगा तू तेरी तो compalin करती हूँ।" प्रतीक बैग फेकने की हरकत से गुस्साते हुए बोला- "दिखाई नही देता क्या तमको क्या ?" लड़की पलट के देखते बोली "अरे वो देखा नही साइड से रख दो तुम।" हद है गलती भी अकड़ भी प्रतीक मन में सोचने लगा और बैग उसकी सीट पर फेंक कर बोला -"तमीज नही है क्या ?" और खिड़की की तरफ देखने लगा । वो प्रतीक की बात इग्नोर कर अपनी सीट बैठ गयी । प्रतीक फ़ोन चार्ज करने की लिए बैग से चार्जर निकला तभी वो झुमका नीचे गिर गया तभी निषी झुमका देख बोली-"exuse me ये झुमका कहाँ से मिला तुम्हे ?" प्रतीक बोला -तुमसे मतलब ! निषी गुस्से में देखते बोली "ये मेरा है खो गया था , तुमको कहाँ से मिल गया ?" प्रतीक ने कहा "कल एक बद्तमीज़ लड़की टकरा गयी थी उसी का गिर गया था ।"  निषी झल्लाती हुई बोली "वो लड़की में ही हूँ और बद्तमीज़ किसको बोला देख कर खुद नही चलते हो।" प्रतीक गुस्से में कहा "ओ हेल्लो साड़ी के साथ हील पहने के कोन भागता है, गिरोगी ही।" "तुमसे मतलब तुम बताओगे क्या पहनू या ना पहनू और तुम वापस नही कर सकते थे अगर गिर गया था।" निषी अकड़ते हुए बोली। प्रतीक ने कहा यही काम नही मेरे पास की लोगो से टकराने के बाद उनके सामान वापस करता रहूँ समझी तुम गलती भी खुद की  और अकड़ भी खुद दिखाओ तुम्हारे साथ अब तो अकेले इस केबिन में और नही रह सकता टी.टी. से बोल के सीट चेंज करता हूँ वरना पूरा सफर ख़राब कर दोगी।" हाँ मुझे भी शोक नही अपना सफर खराब करने का में खुद उस कमीने टी.टी.से बोल सीट चेंज करती हूँ। दोनों गुस्से में केबिन से निकल कर टी. टी. के पास चल देते एक केबिन के इस तरफ तो दूसरा उस तरफ लेकिन तभी ट्रैन की सीटी की आवाज आती है और ट्रेन चल देती  है।
                  ...to be continue....
To read 2nd part-
Love in train (part-2)
To read 3rd part-
Love in train (part-3)
To read last part-
Love in train (lastpart)


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